मातंगी मूल मंत्र विधानरुद्रयामल तंत्रहिन्दी
माँ मातंगी मूल मंत्र विनियोग ध्यान और जप विधि -रुद्रयामल तंत्र
श्रीदेवता✦ श्रीमातंगी
मातंगी साधनादशमहाविद्या साधनामूल मंत्रमंत्र विधानरुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में '६. भगवती मातंगी की साधना' के अंतर्गत '(ख) मन्त्र-विधान' दिया गया है।
मूल मंत्र
(ख) मन्त्र-विधान विनियोग अस्य श्रीमातंगीमन्त्रस्य दक्षिणामूर्तिरृषिः विराट् छन्दः श्रीमातंगीदेवता ह्रीं बीजं हूं शक्तिः क्लीं कीलकं मम सर्ववांछितार्थसिद्धये जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास दक्षिणामूर्तिऋषये नमः (शिरसि), विराट्छन्दसे नमः (मुखे), श्रीमातंगी देवतायै नमः (हृदये), ह्रीं बीजाय नमः (गुह्ये), हूं शक्तये नमः (पादयोः), क्लीं कीलकाय नमः (नाभौ), विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) । कर-हृदयादिन्यास ह्रीं, क्लीं, हूं, ह्रीं, क्लीं, हूं (इन बीजों से करें) । ध्यान श्यामां शुभ्रांशुभालां त्रिकमलनयनां रत्नसिंहासनस्थां, भक्ताभीष्टप्रदात्रीं सुरनिकरकरासेव्यकञ्जाङ्घ्रियुग्माम् । नीलाम्भोजांशुकान्तिं निशिचरनिकरारण्यदावाग्निरूपां, पाशं खड्गं चतुर्भिर्वरकमलकरैः खेटकञ्चाङ्कुशञ्च ॥ मातङ्गीमावहन्तीमभिमत भयदां मोदिनीं चिन्तयामि ॥ अन्य ध्यान पद्य श्यामाङ्गीं शशिशेखरां त्रिनयनां सद्रत्नसिंहासने, संस्थां रत्नविचित्रभूषणयुतां संक्षीणमध्यस्थलाम् । आपीनस्तनमण्डलां स्मितमुखीं वन्दे दधानां क्रमाद्, वेदैर्बाहुभिरङ्कुशासिलतिके पाशं तथा खेटकम् ॥ मूल मन्त्र ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातङ्ग्यै फट् स्वाहा ।
बीज मंत्र
ह्रींहूंक्लीं
साधना विधि
स्रोत के अनुसार विनियोग, ऋष्यादिन्यास, कर-हृदयादिन्यास और ध्यान के बाद मानसोपचार पूजन करके मन्त्र जप करें। पूजा के लिए 'षट्कोण, अष्टदल और भूपुर' से यन्त्र बनाकर जवापुष्प से पूजा करने का निर्देश है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- सर्ववांछितार्थसिद्धि
- मन्त्र जप
- मानसोपचार पूजन
- षट्कोण, अष्टदल और भूपुर यन्त्र
- जवापुष्प से पूजा
लाभ
- सर्ववांछितार्थसिद्धि
- भक्ताभीष्टप्रदात्री साधना
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
(ख) मन्त्र-विधान विनियोग--अस्य श्रीमातंगीमन्त्रस्य दक्षिणामूर्तिरृषिः विराट्-छन्दः श्रीमातंगीदेवता ह्रीं बीजं हूं शक्तिः क्लीं कीलकं मम सर्ववांछितार्थसिद्धये जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास--दक्षिणामूर्तिऋषये नमः (शिरसि), विराट्छन्दसे नमः (मुखे), श्रीमातंगी देवतायै नमः (हृदये), ह्रीं बीजाय नमः (गुह्ये), हूं शक्तये नमः (पादयोः), क्लीं कीलकाय नमः (नाभौ), विनियोगाय नमः (सर्वाङ्गे) । कर-हृदयादिन्यास--ह्रीं, क्लीं, हूं, ह्रीं, क्लीं, हूं (इन बीजों से करें) । ध्यान--श्यामां शुभ्रांशुभालां त्रिकमलनयनां रत्नसिंहासनस्थां, भक्ताभीष्टप्रदात्रीं सुरनिकरकरासेव्यकञ्जाङ्घ्रियुग्माम् । नीलाम्भोजांशुकान्तिं निशिचरनिकरारण्यदावाग्निरूपां, पाशं खड्गं चतुर्भिर्वरकमलकरैः खेटकञ्चाङ्कुशञ्च ॥ मातङ्गीमावहन्तीमभिमत भयदां मोदिनीं चिन्तयामि ॥ अन्य ध्यान पद्य इस प्रकार भी मिलता है-- श्यामाङ्गीं शशिशेखरां त्रिनयनां सद्रत्नसिंहासने, संस्थां रत्नविचित्रभूषणयुतां संक्षीणमध्यस्थलाम् । आपीनस्तनमण्डलां स्मितमुखीं वन्दे दधानां क्रमाद्, वेदैर्बाहुभिरङ्कुशासिलतिके पाशं तथा खेटकम् ॥ मानसोपचार पूजन करके मन्त्र जप करें । मन्त्र इस प्रकार है-- ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातङ्ग्यै फट् स्वाहा । पूजा के लिए 'षट्कोण, अष्टदल और भूपुर' से यन्त्र बनाएं तथा जवापुष्प से पूजा करें । १. यह पांच पदों वाला ध्यान पद्य है, अतः ऐसा ही पाठ करें ।
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