अन्य मन्त्रों के साथ मृत्युंजय मन्त्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी
शतावरी गायत्री के साथ मृत्युंजय मंत्र जप -रुद्रयामल तंत्र
मृत्युंजय मन्त्रशतावरी-गायत्रीरुद्रयामल तंत्र
तंत्र संदर्भ
स्रोत में मृत्युंजयमन्त्र को शतावरी-गायत्री में स्थान मिला बताया गया है।
मूल मंत्र
१. ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥ २. ॐ जातवेदसे सुनवाम सोममरातीयतो निदहाति वेदः। स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वानावेव सिन्धुं दुरितात्यग्निः॥ ३. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
साधना विधि
इस मन्त्र के आदि में “ॐ भूर्भुवः स्वः” तथा अन्त में “स्वः भुवः भूः ॐ” लगाकर जप करने से इस लोक और परलोक दोनों में सुख-शान्ति प्राप्त होती है। ऐसा “प्रपंचसारसंग्रह” में कहा गया है।
प्रयोग — कब और कहाँ
- शतावरी-गायत्री जप
- मृत्युंजय मन्त्र जप
- अन्य मन्त्रों के साथ मृत्युंजय मन्त्र
लाभ
- इस लोक और परलोक दोनों में सुख-शान्ति
मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)
१६. अन्य मन्त्रों के साथ मृत्युंजय मन्त्र तन्त्रों में एक मन्त्र को अन्य अपेक्षित मन्त्रों के साथ मिलाकर जप करने के भी निर्देश दिए गए हैं। अतः मृत्युंजयमन्त्र को “शतावरी-गायत्री” में स्थान मिला है। यथा—
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