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श्रीविद्या परा स्तोत्र श्लोकरुद्रयामल तंत्रहिन्दी

श्रीविद्या परा स्तोत्र इच्छा ज्ञान क्रिया शक्ति श्लोक -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवताश्रीविद्या / त्रिपुरललिता / काली

श्रीविद्या साधनापरा स्तोत्रमहात्रिपुर सुन्दरी उपासनारुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में श्रीविद्या-साधना के वैविध्य के प्रसंग में परा स्तोत्रकार के कथन के रूप में यह श्लोक उद्धृत किया गया है।

मूल मंत्र

पुरोभूतेच्छाशक्तिस्त्रिपुरललिता हादिमतगा,
महोभा ज्ञानाख्या जगति विदिता सादिमतगा।
क्रियाशक्तिः काली कलननिरता कादिमतगा,
परे ! एकं त्वं जयसि मतभेदत्रिपुरयुक् ॥४॥

साधना विधि

स्रोत के इस अंश में इस श्लोक को परा स्तोत्रकार के कथन के रूप में उद्धृत किया गया है। इस श्लोक के लिए अलग जप-विधि इस अंश में नहीं दी गयी है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • श्रीविद्या साधना
  • परा स्तोत्र पाठ
  • इच्छा ज्ञान क्रिया शक्ति उपासना
  • महात्रिपुर सुन्दरी उपासना

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

जैसा कि परा स्तोत्रकार ने कहा है-- पुरोभूतेच्छाशक्तिस्त्रिपुरललिता हादिमतगा, महोभा ज्ञानाख्या जगति विदिता सादिमतगा। क्रियाशक्तिः काली कलननिरता कादिमतगा, परे ! एकं त्वं जयसि मतभेदत्रिपुरयुक् ॥४॥ इत्यादि ॥

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