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वेदोक्त त्र्यम्बक मंत्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

वेदोक्त दोनों त्र्यम्बक महामृत्युंजय मंत्र जप -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवतात्र्यम्बक

त्र्यम्बक मंत्रवेदोक्त मंत्ररुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में शुक्लयजुर्वेदसंहिता के दो त्र्यम्बक मन्त्रों को एक साथ जप करने का मत दिया गया है।

मूल मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पतिवेदनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनादितो मुक्षीय मामुतः॥

साधना विधि

स्रोत के अनुसार कुछ आचार्यों का मत है कि दोनों त्र्यम्बक मन्त्रों का एक साथ जप होना चाहिए।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • वेदोक्त त्र्यम्बक मन्त्र जप
  • पुष्टिकारक जप
  • रक्षाकारक जप

लाभ

  • पुष्टिकारक
  • रक्षाकारक

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

१५. वेदोक्त दोनों त्र्यम्बक मन्त्र शुक्लयजुर्वेदसंहिता में दो त्र्यम्बक मन्त्रों का एक मन्त्र दिया है। कुछ आचार्यों का मत है कि उन दोनों मन्त्रों का एक साथ जप होना चाहिए, क्योंकि एक मन्त्र पुष्टिकारक है और दूसरा रक्षाकारक। यह पूरा मन्त्र इस प्रकार है—

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