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विलोमाक्षर मृत्युंजय मन्त्ररुद्रयामल तंत्रहिन्दी

विलोमाक्षर त्र्यम्बक मृत्युंजय मंत्र -रुद्रयामल तंत्र

श्रीदेवतात्र्यम्बक मृत्युंजय

विलोमाक्षर मन्त्रत्र्यम्बक मन्त्रमृत्युंजय मन्त्ररुद्रयामल तंत्र

तंत्र संदर्भ

स्रोत में विलोमाक्षरों से त्र्यम्बक मन्त्र जपने की तांत्रिक प्रक्रिया का संकेत दिया गया है।

मूल मंत्र

ॐ त् ता मृ मा य क्षो मृ त्यो मु न् ना न्ध ब व मि क रु र्वा उ।
म् न धं व ष्टि पु न्धिं ग सु हे म जा य कं म्ब त्र्य॥

साधना विधि

स्रोत के अनुसार विलोमाक्षरों से त्र्यम्बक मन्त्र जपने की प्रक्रिया तन्त्र ग्रन्थों में प्राप्त है। इसके आगे किसी भी प्रकार, व्याहृति आदि बीजों को लोम-विलोम रूप से लगाया जा सकता है।

प्रयोग — कब और कहाँ

  • विलोमाक्षर त्र्यम्बक मन्त्र जप
  • मन्त्रजप में विशेष चैतन्य
  • व्याहृति आदि बीजों का लोम-विलोम प्रयोग

लाभ

  • मन्त्रजप में विशेष चैतन्य लाने की दृष्टि से

मूल पाठ (तंत्र से उद्धरण)

२५. विलोमाक्षर-मृत्युंजय मन्त्र तान्त्रिक-विधानों में मन्त्रजप के लिए तथा उनमें विशेष चैतन्य लाने की दृष्टि से कई नए-नए विधान बताये गये हैं। इसी दृष्टि से विलोमाक्षरों से भी यह “त्र्यम्बक मन्त्र” जपने की प्रक्रिया तन्त्र ग्रन्थों में प्राप्त है। यथा— ॐ त् ता मृ मा य क्षो मृ त्यो मु न् ना न्ध ब व मि क रु र्वा उ। म् न धं व ष्टि पु न्धिं ग सु हे म जा य कं म्ब त्र्य॥ इसके आगे किसी भी प्रकार, व्याहृति आदि बीजों को लोम-विलोम रूप से लगाया जा सकता है। इसी प्रकार और भी शास्त्रों में बहुत से प्रकार दिए गए हैं; किन्तु विस्तार भय से यहां संकेत मात्र किया है।

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