का सरल उत्तर
गीता (2.20) और कठोपनिषद में स्पष्ट कहा गया है — आत्मा अजन्मा, नित्य, शाश्वत और अविनाशी है। शरीर के नाश होने पर भी आत्मा नष्ट नहीं होती।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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