का सरल उत्तर
अभिमंत्रण के बाद रत्न जड़ वस्तु से 'चैतन्य' बन जाता है — वह ग्रह-रश्मि आकर्षण से बढ़कर देवी कृपा का शक्तिशाली माध्यम, सिद्ध कवच और दैवीय यंत्र बन जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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