का सरल उत्तर
आग्नेयास्त्र चलाने पर आकाश से अग्नि-गोले बरसते हैं और शत्रु-सेना जलती है। इसे केवल वारुणास्त्र (जल-अस्त्र) से बुझाया जा सकता था। महाभारत के लगभग सभी महारथियों के पास यह था।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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