विस्तृत उत्तर
आग्नेयास्त्र अग्निदेव का दिव्यास्त्र है जो अत्यंत विध्वंसक था।
आग्नेयास्त्र क्या है — यह अस्त्र चलाने पर आकाश से अग्नि के गोले शत्रु-सेना पर बरसने लगते हैं। इस अस्त्र का आह्वान करने पर सम्पूर्ण युद्ध-क्षेत्र में अग्नि-वर्षा होने लगती है। यह शत्रु-सेना को जलाकर नष्ट करने में सक्षम था।
प्रमुख विशेषता — आग्नेयास्त्र से उत्पन्न अग्नि साधारण अग्नि नहीं थी — यह दिव्य अग्नि थी जिसे जल या साधारण उपायों से बुझाना संभव नहीं था। इसे केवल 'वारुणास्त्र' (वरुण/जल का अस्त्र) से बुझाया जा सकता था।
उपयोग — महाभारत में लगभग सभी महारथियों को आग्नेयास्त्र का ज्ञान था — भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण, अर्जुन, अश्वत्थामा, अभिमन्यु आदि। रामायण में भी इसका उल्लेख है। यह एक सामान्य दिव्यास्त्र था जो अनेक योद्धाओं के पास था।





