का सरल उत्तर
अहम् ब्रह्मास्मि बृहदारण्यक उपनिषद (1.4.10) का महावाक्य है — 'मैं ब्रह्म हूँ।' ध्यान में 'नेति-नेति' से शरीर-मन-बुद्धि को हटाते जाएं, जो शुद्ध चेतना शेष रहे उसे पहचानें — वही ब्रह्म है। यह उच्च-स्तरीय वेदांत साधना है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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