का सरल उत्तर
अहोई अष्टमी: कार्तिक कृष्ण अष्टमी (करवा चौथ + 4 दिन)। विधि: निर्जला/फलाहार → अहोई माता (सेही) चित्र → संध्या पूजन-कथा → तारे/चन्द्र देखकर अर्घ्य → व्रत पारण। संतान रक्षा-दीर्घायु हेतु। उत्तर भारत प्रचलित।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।