का सरल उत्तर
यह व्रत मुख्य रूप से पितरों (पूर्वजों) की शांति, पितृ दोष निवारण और मानसिक शांति पाने के लिए किया जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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