विस्तृत उत्तर
धर्मशास्त्रों के अनुसार अमावस्या का व्रत मुख्य रूप से पितरों (पूर्वजों) की तृप्ति और 'पितृ दोष' की शांति के लिए किया जाता है। जहाँ पूर्णिमा देवताओं को समर्पित है, वहीं अमावस्या पितरों के लिए है। इस दिन व्रत करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है, घर में संतुलन आता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।





