विस्तृत उत्तर
मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म-रूपांतरण की एक प्रक्रिया है। शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत साधक के भीतर के 'असुरों' (काम, क्रोध, लोभ, मोह) का नाश कर 'चित्त शुद्धि' करता है, ठीक वैसे ही जैसे देवी ने महिषासुर का वध किया था। भौतिक दृष्टि से यह व्रत धन, धान्य और संतान सुख प्रदान करता है। ज्योतिष के अनुसार, राहु (जो छाया ग्रह है और भ्रम पैदा करता है) की शांति के लिए दुर्गा उपासना सर्वश्रेष्ठ उपाय है। इसके अतिरिक्त, जिन कन्याओं के विवाह में बाधा आ रही हो, उनके लिए कात्यायनी मंत्र के साथ यह व्रत विशेष फलदायी बताया गया है।



