विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा का व्रत मानसिक शांति, आत्मिक उत्थान, मनोकामना पूर्ति और अकाल मृत्यु (Apamrityu) से बचने के लिए किया जाता है। स्कन्द पुराण के अनुसार कलयुग में भगवान सत्यनारायण (विष्णु) की कृपा पाने के लिए यह सबसे श्रेष्ठ व्रत है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह शरीर के द्रवों को संतुलित कर क्रोध और बेचैनी को शांत करता है।





