विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष के कारण जब पृथ्वी पर सांपों, बिच्छुओं और विषैले जंतुओं का भयंकर आतंक छा गया, तब प्राणियों को अभय दान देने के लिए देवी मनसा का प्राकट्य हुआ। इनकी पूजा मुख्य रूप से मृत्युलोक के प्राणियों को सर्प-दंश (सांप के काटने) और भयंकर विष के प्रकोप से मुक्ति दिलाने के लिए की जाती है। इस व्रत को करने से घर-परिवार में कभी नाग-भय नहीं सताता और माता की कृपा से विष भी अमृत हो जाता है।





