विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार, गुरुवार का व्रत मुख्य रूप से देवगुरु बृहस्पति और जगत के पालनहार भगवान श्री विष्णु को समर्पित है। भगवान विष्णु 'पालनकर्ता' हैं और ज्योतिष में बृहस्पति 'वृद्धि' (Expansion) के कारक हैं। दोनों ही 'सत्वगुण' के अधिष्ठाता हैं और दोनों को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। विद्या, धन, संतान और दांपत्य सुख की प्राप्ति तथा अज्ञान व दरिद्रता के नाश के लिए इन दोनों देवताओं की एक साथ उपासना की जाती है।




