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सत्यनारायण से जुड़े सभी प्रश्न(7)

सत्यनारायण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 7 प्रश्न उपलब्ध हैं।

पूजा विधि

सत्यनारायण पूजा की विधि?

पूर्णिमा सर्वोत्तम। कलश→गणेश→5 अध्याय कथा→प्रत्येक बाद आरती→पंचामृत अभिषेक→सूप(प्रसाद)→'ॐ जय जगदीश'→प्रसाद वितरण। प्रसाद अवश्य लें।

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व्रत का महत्व

पूर्णिमा का व्रत क्यों किया जाता है?

यह व्रत मानसिक शांति, मनोकामनाओं की पूर्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए किया जाता है। कलयुग में भगवान सत्यनारायण की कृपा पाने के लिए यह सबसे उत्तम व्रत है।

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व्रत विधि

पूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजा करने का क्या विधान है?

सत्यनारायण: पूर्णिमा=शुभ तिथि, विष्णु सत्य स्वरूप। विधि: षोडशोपचार→कथा (5 अध्याय, अनिवार्य)→आरती→प्रसाद (शीरा+केला)। प्रसाद अस्वीकार न करें। अवसर: नया कार्य, गृह प्रवेश, मनोकामना। सरलतम गृहस्थ पूजा।

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व्रत

पूर्णिमा व्रत कैसे रखें और पूजा कैसे करें

पूर्णिमा व्रत: प्रातः स्नान → संकल्प → निराहार/फलाहार/एकभुक्त। पूजा: गणपति → सत्यनारायण/विष्णु → रात्रि चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → सत्यनारायण कथा → दान। विशेष: गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा।

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पूजा विधि

सत्यनारायण पूजा पूर्णिमा को क्यों करते हैं

सत्यनारायण पूजा पूर्णिमा को क्यों: (1) स्कन्द पुराण में शुक्ल पक्ष/पूर्णिमा विधान। (2) पूर्णिमा = विष्णु की तिथि, पूर्णता-सम्पन्नता प्रतीक। (3) शुक्ल पक्ष चरम = सर्वाधिक शुभ। (4) मासिक नियमितता सुविधाजनक। अन्य दिन भी मान्य: एकादशी, संक्रान्ति, शुभ अवसर।

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पूजा विधि

सत्यनारायण पूजा में प्रसाद कैसे बनाएं

सत्यनारायण प्रसाद = शीरा (सूजी हलवा): सूजी + घी + चीनी + जल + इलायची + केसर + काजू-किशमिश + केला। सूजी घी में भूनें → गरम जल → चीनी → सूखे मेवे → केला। पंचामृत: दूध+दही+घी+शहद+शक्कर। गाय का घी उत्तम। तुलसी पत्र अनिवार्य। शुद्ध मन से बनाएँ।

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पूजा विधि

सत्यनारायण पूजा में कलश स्थापना कैसे करें

कलश स्थापना: चौकी पर अक्षत → ताँबे का कलश → शुद्ध जल + गंगाजल + तुलसी + दूर्वा + सुपारी + सिक्का → 'कलशस्य मुखे विष्णुः...' मंत्र से पूजन → 5 आम पत्ते मुख पर → नारियल (रोली-चन्दन-मौली सहित) ऊपर → कलश के गले में मौली। कलश = ब्रह्माण्ड का प्रतीक।

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