का सरल उत्तर
श्वेताश्वतर उपनिषद श्लोक: जो अनादि-अनंत, विश्व के मध्य गूढ़ रूप से विद्यमान, अनेक रूपों वाला विश्व-स्रष्टा और विश्व को चारों ओर से आवेष्टित करने वाला है — उस 'शिव' को जानकर जीव परम शांति (मोक्ष) पाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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