ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
सरल उत्तर

'अनाद्यनन्तं कलिलस्य मध्ये' श्लोक का क्या अर्थ है?

का सरल उत्तर

सरल उत्तर

श्वेताश्वतर उपनिषद श्लोक: जो अनादि-अनंत, विश्व के मध्य गूढ़ रूप से विद्यमान, अनेक रूपों वाला विश्व-स्रष्टा और विश्व को चारों ओर से आवेष्टित करने वाला है — उस 'शिव' को जानकर जीव परम शांति (मोक्ष) पाता है।

सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें

मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।

श्रेणी
दार्शनिक महत्त्व और उपनिषद

इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।