अपसव्य का अर्थ क्या है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
अपसव्य वह अवस्था है जिसमें जनेऊ दाएं कंधे पर और बाएं हाथ के नीचे रखा जाता है। यह पितृ कार्य अर्थात् श्राद्ध, तर्पण और पिण्डदान के समय की विशेष अवस्था है। अप विपरीत और सव्य बाएं से बना यह शब्द है, अर्थात् सव्य का उलट या दाएं ओर। यह देव कार्य की सव्य अवस्था से भिन्न है।
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