का सरल उत्तर
असितांग भैरव का मूल मंत्र: 'ॐ ह्रीं ह्रां ह्रीं ह्रुं जं क्लां क्लीं क्लुं ब्राह्मी देवी समेताय असिताङ्ग भैरवाय सर्व शाप निवर्तिताय ॐ ह्रीं फट् स्वाहा'।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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