का सरल उत्तर
अथर्ववेद में आग्नेयास्त्र और वायव्यास्त्र के साथ पर्जन्यास्त्र का उल्लेख है जहाँ शत्रु को मोहित और नष्ट करने के लिए इन अस्त्रों का आह्वान किया गया है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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