का सरल उत्तर
अपार आनन्द — नगर सजा, तोरण-पताकाएँ, मंगलगान। 'नगर नारि नर रूप निहारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी' — बहुओं का रूप देख नेत्र-फल पाकर सुखी। ब्राह्मणों को दान, गरीबों को भोजन, अयोध्या उत्सवमय।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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