का सरल उत्तर
बजरंग बाण में भगवान राम की शपथ दिलाई गई है, इसलिए इसे नित्य पूजा या छोटी समस्याओं के लिए नहीं पढ़ना चाहिए। इसका प्रयोग केवल प्राणघातक संकट में ही होता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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