का सरल उत्तर
भागवत का संदेश है — स्वर्लोक अस्थायी है। शुद्ध भक्त इसकी कामना नहीं करते। पुण्य क्षीण होने पर वापसी निश्चित है। अंतिम लक्ष्य 'यद्गत्वा न निवर्तन्ते' वाला परम धाम है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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