का सरल उत्तर
भगवान के विराट स्वरूप में भुवर्लोक नाभि-स्थान पर है। पाताल से भूलोक चरणों में है, भुवर्लोक नाभि में है और स्वर्लोक वक्षस्थल-सिर में।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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