का सरल उत्तर
भैरव मंत्र: मूल — 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरुकुरु बटुकाय ह्रीं।' सरल — 'ॐ काल भैरवाय नमः।' बटुक — 'ॐ ह्रौं ह्रीं ह्रूं बटुकाय...।' नित्य 108, विशेष 1008 जप। फल: आपदाओं से रक्षा, शत्रु नाश।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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