का सरल उत्तर
भैरव साधना: भैरव अष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी — सर्वश्रेष्ठ)। प्रत्येक शनिवार। अमावस्या रात्रि। चतुर्दशी। निशीथ काल (रात 12 बाद)। उत्तर/पूर्व मुख। संध्या काल वर्जित।
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