का सरल उत्तर
भक्त-अपराध किसी भी संत, वैष्णव या भक्त की निंदा या अपमान है — यह सभी पुण्यों को नष्ट कर देता है और उग्र साधना के दौरान सबसे बड़ा अवरोध बनता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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