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सरल उत्तर

भक्ति में कर्मकांड जरूरी या प्रेम पर्याप्त

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कर्मकांड — अनुशासन और ढांचा देता। प्रेम — गीता 9.26, मीरा, कबीर 'ढाई आखर प्रेम।' सत्य — कर्मकांड सीढ़ी है, प्रेम मंजिल। शुरुआत कर्मकांड, लक्ष्य प्रेम। प्रेम बिना कर्मकांड खोखला।

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सरल उत्तर: भक्ति में कर्मकांड जरूरी या प्रेम पर्याप्त