का सरल उत्तर
भाव शुद्धि और द्रव्य शुद्धि परस्पर आश्रित हैं — शुद्ध धातु का सात्विक स्पंदन भावों को उन्नत करता है और शुद्ध भाव वाला शास्त्र-सम्मत द्रव्य चुनता है। दोनों का संयोग दैवीय कृपा अनिवार्य बनाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।