का सरल उत्तर
भूतशुद्धि = ध्यान में पंचतत्वों को क्रमशः लय करना: पृथ्वी → जल → अग्नि → वायु → आकाश → अहंकार → महत → परब्रह्म की प्रकृति/माया में। इसके बाद दिव्य, शुद्ध शरीर की भावना — जो देवी की उपासना के योग्य हो।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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