का सरल उत्तर
ऊपरी भुवर्लोक के सिद्धादि रजो-सात्त्विक हैं जबकि निचले भुवर्लोक के प्रेतादि तमोगुण प्रधान हैं। दोनों ही पूर्णतः सत्वगुणी न होने से मोक्ष नहीं पाते।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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