का सरल उत्तर
श्लोक है: 'त्रिदलं त्रिगुणाकारं, त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्। त्रिजन्मपाप संहारं, एकबिल्वं शिवार्पणम्॥' (तीन गुणों और तीन नेत्रों वाले, तीन जन्मों के पाप मिटाने वाले इस बेलपत्र को मैं शिव को अर्पित करता हूँ)।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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