का सरल उत्तर
छिन्नमस्ता का मुख्य मंत्र है — 'श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीयै हूं हूं फट् स्वाहा॥'। इसमें चार बीजाक्षर (श्रीं, ह्रीं, क्लीं, ऐं) संयुक्त हैं। वे दस महाविद्याओं में छठी, स्वयंबलि और आत्मसंयम की देवी हैं। उनका मंदिर राँची के पास रजरप्पा में है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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