चित्त का लक्ष्य में न ठहरना क्या कहलाता है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
समाधि अवस्था पाकर भी भवबन्धन के कारण चित्त का लक्ष्य में न ठहरना अनवस्थितचित्तत्व कहलाता है।
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