का सरल उत्तर
श्लोक अर्थ: यह मानव शरीर ही देवालय है और भीतर बैठा जीव ही सदाशिव है। केवल अज्ञान रूपी निर्माल्य (कूड़ा) त्यागना है। अज्ञान हटते ही 'सोऽहं' (मैं ही शिव हूँ) की परम अद्वैत पूर्णता प्राप्त होती है — यही वेदों और शिव पुराण का परम उपदेश है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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