का सरल उत्तर
शास्त्र में भाव शुद्धि द्रव्य शुद्धि से ऊपर है — बिना श्रद्धा के स्वर्ण श्रीयंत्र भी रेखाचित्र है और अष्टधातु प्रतिमा पाषाण तुल्य। परमात्मा भाव के भूखे हैं, वैभव के नहीं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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