का सरल उत्तर
ध्यान में मन का भटकना स्वाभाविक है। गीता 6.26 — 'मन जहाँ जाए वहाँ से लौटाते रहो।' उपाय: पहले प्राणायाम करें, श्वास को आधार बनाएं, नियमित समय-स्थान रखें, मन दबाएं नहीं बल्कि साक्षी भाव से देखें। धैर्य और नियमितता ही एकमात्र उपाय है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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