का सरल उत्तर
दीक्षा के बाद शिष्य का जीवन पूर्णतः रूपांतरित होता है — अंतस के विकार और चंचलता समाप्त होती है, चित्त शुद्ध होता है और वह आत्म-ज्ञान के मार्ग पर दृढ़ता से स्थापित हो जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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