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विस्तृत उत्तर
यह पुनर्जन्म शिष्य के जीवन को पूर्णतः रूपांतरित कर देता है। उसके अंतस के विकार और चंचलता समाप्त होने लगते हैं, चित्त शुद्ध होता है और वह आत्म-ज्ञान के मार्ग पर दृढ़ता से स्थापित हो जाता है, जहां गुरु की ऊर्जा सदैव उसकी रक्षा और मार्गदर्शन करती है।
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