विस्तृत उत्तर
इसी गहन रूपांतरण के कारण दीक्षा को 'द्विजत्व' की प्राप्ति या 'आध्यात्मिक पुनर्जन्म' कहा गया है।
मनुष्य का पहला जन्म माता-पिता के रज-वीर्य से होता है, जो उसे एक भौतिक शरीर प्रदान करता है। किंतु उसका दूसरा, वास्तविक और अधिक महत्वपूर्ण जन्म गुरु के माध्यम से होता है, जब गुरु ज्ञान और शक्ति का संचार कर उसके आध्यात्मिक अस्तित्व को जन्म देते हैं।
इस दीक्षा-संस्कार के उपरांत ही व्यक्ति 'द्विज' अर्थात 'दो बार जन्मा हुआ' कहलाता है।





