का सरल उत्तर
बटुक भैरव साधना दक्षिण दिशा में मुख करके करनी चाहिए — यह भैरव की दिशा है। उत्तर दिशा वर्जित है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।