का सरल उत्तर
हाँ, द्वितीया श्राद्ध से कन्या के विवाह की बाधा दूर होती है। याज्ञवल्क्य स्मृति का यह उद्घोष कि द्वितीया श्राद्ध से सुयोग्य दामाद की प्राप्ति होती है, इसे सन्तान के विवाह की बाधाओं को दूर करने के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाता है। पितर तृप्त होकर योग्य वर का संकेत देते हैं, विवाह में देरी दूर होती है, परिवारों के बीच सद्भाव बनता है, और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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