का सरल उत्तर
द्वितीया श्राद्ध से सुयोग्य दामाद पितरों के विशेष आशीर्वाद से मिलता है। कर्ता को काम्य भावना से संकल्प करके पूर्ण विधि-विधान से श्राद्ध करना चाहिए - कुतप मुहूर्त में, नैऋत्य दिशा में मुख करके, अपसव्य अवस्था में। कुश, तिल, सत्तू, घृत, मधु से पिण्डदान, पञ्चबलि और ब्राह्मण भोजन सब करें। तृप्त पितर कन्या के लिए अत्यंत सुयोग्य, श्रेष्ठ और धर्मनिष्ठ वर का संकेत देते हैं।