का सरल उत्तर
व्रत अगले दिन (द्वादशी) की सुबह सूरज निकलने के बाद ही खोलना चाहिए। द्वादशी के शुरुआती समय ('हरिवासर') में व्रत नहीं खोलते। व्रत खोलने के लिए चरणामृत और तुलसी का इस्तेमाल करना चाहिए।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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