का सरल उत्तर
'एको हं बहुस्याम्' का अर्थ है 'मैं एक हूँ, अनेक हो जाऊँ' — यह परब्रह्म का वह संकल्प है जिससे निर्गुण में स्पंदन उत्पन्न हुआ और नाद-ब्रह्म (शब्द-ब्रह्म) प्रकट हुआ।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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