का सरल उत्तर
गंगा=पापनाशिनी(स्कंद पुराण)। 1 डुबकी=सभी पाप क्षय। मोक्ष(विष्णु चरणोदक), पितृ तृप्ति, रोग मुक्ति(एंटीबैक्टीरियल), शांति। कुंभ/संक्रांति=करोड़ गुना। गंगाजल कभी खराब नहीं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।