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सरल उत्तर

गीता के पांचवें अध्याय कर्मसंन्यासयोग का मूल संदेश

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पाँचवें अध्याय का मूल संदेश: कर्मयोग कर्म संन्यास से सुलभ और श्रेष्ठ है। अकर्तापन के भाव से कर्म करो। राग-द्वेष से मुक्त होना ही सच्चा संन्यास है।

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