गृहस्थ सत्संग महत्व
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सरल उत्तर
'बिनु सत्संग विवेक न होई' (तुलसीदास)। तनाव शांति, संस्कार, मार्गदर्शन, भक्ति+ज्ञान। मंदिर/आश्रम/online/परिवार कथा 15 min। करोड़ पाप नष्ट।
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गृहस्थ धर्म
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